रिक्त मन,
उदास आनन,
और शुष्क अधरों पर,
#सजावटी मुस्कान।
बनती है अंग
परिधान का ।।
ढलती सांझ,
बोझिल रजनी,
पनीली आंखों के साथ,
#सजावटी गीत।
बनते हैं अंग
बेरंग रंग का ।।
कहती है प्रीत,
मिलते हैं मीत
जीवन के पार भी।।
न #सजावटी मुस्कान जी
न #सजावटी गीत जी
स्मृति में मुस्करा,
प्रतीक्षा में गीत गा,
जीवन के पार है,
मिलन की मंगल घड़ी।।