भैया यह तो रामराज्य है
काहे को लोकतंत्र तुम्हारा
बोले आत्मनिर्भर हो जाओ
टूटी चप्पल और घिसाओ
रोटी-पानी को तरसो तुम
बीच सड़क पे मारे जाओ
भैया यह तो नागराज्य है
काहे को लोकतंत्र तुम्हारा
जनता दुर्दिन को जीवत है
लेखक मधुर कहानी कहता
राष्ट्रवाद का चूरन देकर
लार चुआता व्यंजन खाता
भैया यह तो कामराज्य है
काहे को लोकतंत्र तुम्हारा
हिन्दू-मुस्लिम भाई-भाई
दोनों में फिर हुई लड़ाई
मीडिया में भी घमासान है
नेता जी की खूब कमाई
भैया यह तो दामराज्य है
काहे को लोकतंत्र तुम्हारा