आप सबका बहोत बहोत शुक्रिया मेरी कविताओंको सराहने के लिए। आज मेरी एक ओर किताब प्रकाशित हुई है जिसका शीर्षक है "अरसा हो गया गुजरे तेरी गली की अंगड़ाई से।।" ।।
यदि लिखने में कही कोई भूल हो तो मुझे जरूर बताइयेगा ताकि में उसे सुधार पाऊ।
शुरुआत कुछ इस प्रकार है:
अब चांद से होती गुफ़्तगू की रिहाई से,
पा लेते है राहत चंद लम्हो की कटाई से।
क्योंकि,
अरसा हो गया गुजरे तेरी गली की अंगड़ाई से।।
आगे और पढ़ने के लिए किताब जरूर पढियेगा ओर अपना प्रतिभाव जरूर से दीजिये।।
तो पेश है यह किताब निचे दी हुई लिंक पर।।
"अरसा हो गया गुजरे तेरी गली की अंगड़ाई से।। - Dilwali Kudi की कलम से।।" by Dilwali Kudi read free on Matrubharti
https://www.matrubharti.com/book/19885793/arsa-ho-gaya-gujare-teri-gali-ki-angdaai-se