उन दिनों की महक इन दिनों आ रही है
सपनों मे कुछ बात सपनों से हो रही है
तेरी तस्वीर क्या मिली पुरानी किताबों मे
कुछ फर्क सा आ गया है दिलके इरादों मे
क्या पता फिर क्यु तू आज दिलपे छा रही है
सपनों मे कुछ बात सपनों से हो रही है
क्या दिन थे वो अपने बस सपने ही सपने
दिन रात तू मेरे और मै बस तेरे हक मे
दर्द मे मुस्कुराके आज फितरत गा रही है
सपनों मे कुछ बात सपनों से हो रही है
Sagar...✍️