कितना सोचे तुझको
कितना समझे तुझको
ऐ जिंदगी,अब मिलना
तुझसे मुझको
गहराइयां तेरी, नादानियां मेरी
समझने मे कटी उमरिया सारी
बचपनकी तर्हां आज फिरसे,
सीखा दे चलना मुझको
ऐ जिंदगी,अब मिलना
तुझसे मुझको
आशाओंके धागे, किस्मत से बांधे
सपने लिए हाथोंमे रात-दिन जागे
सपनों से किस्मतका क्या
रिश्ता है समझना मुझको
ऐ जिंदगी,अब मिलना
तुझसे मुझको
Sagar...✍️