समा मुझमे, तू मेरी जान बन जा
शक्ल मेरी, तू मेरी पहचान बन जा
क्यों ये आंखों तेरी हुई नम
साथ है हम ये भी नही कम
क्या लेना है हमको जग से
तेरी बाहो में चाहे निकले दम
हँसी मेरी, तू मेरी मुस्कान बन जा
समा मुझमे, तू मेरी जान बन जा
सिवा तेरे कोई ऐसा कोई वैसा
एक तू ही है जिस पे भरोसा
देखे है कई अपने पराये
वक़्त पे कोई कैसा कोई कैसा
यकीन मेरा ,तू मेरी जुबान बन जा
समा मुझमे, तू मेरी जान बन जा
जीने की यँहा किसको फिकर है
ओठो पे सबके मरने का जीकर है
साहिल तक है तैरते जाना
राह मे उफनता समंदर है
जमीं मेरी, तू मेरा आसमान बन जा
समा मुझमे, तू मेरी जान बन जा
Sagar...✍️
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