#मर्द
मर्द को दर्द नहीं होता
क्यों नहीं कहते दर्द को दर्द नहीं होता
मुश्किल है उसके लिए बयां करना अपना हर एक जख़्म
क्यों नहीं देखते जो वो नहीं है कहता
ज़िम्मेदारी के बोझ से उसको यू दबाते हैं
पुत्र,पति,पिता के फ़र्ज़ वो ज़िन्दगीभर निभाते हैं
हो गर परेशान, माँ की गोद में सर रख सो जाते हैं
पत्नी संग दोस्ती सा रिश्ता जीवनभर वो चलाते हैं
बन पिता वो खुद बड़े हो जाते हैं
बच्चों की ख़ातिर खुद को ही भुलाते हैं
रहे न कभी ज़िन्दगी में तो बीमा भी वो कराते हैं
न आये परिवार पर कोई मुसीबत इसका तर्क लगाते हैं
हैं वो भी इंसान, दर्द उनको भी होता है
बात वो अलग है, वो परिवार के लिए सब सहता है