शुरुआत से ही काफी विनोदी स्वभाव रहा था उसका।बात बात पर हँसना खिलखिलाना।कॉलेज की तो रौनक थी वो।चेहरे पर सदा मुस्कान आत्मविश्वास से भरी चाल,सब अध्यापक ओर साथी सोचते कि दुनिया भर की खुशियां तो इसे ही मिली हैं, कितनी भाग्यशाली है।कॉलेज में जैसे रोल नंबर 1 थी,पढ़ाई में भी नंबर 1।परीक्षाएं सिर पर थी,वो दिन रात एक कर रही थी,कुछ बनना जो था,माँ बाप का नाम रोशन करना था।अगले दिन परीक्षा थी,वो कॉलेज पहुँची, हमेशा की तरह होठों पे मुस्कान चल में वही आत्मविश्वास, फिर भी आज चेहरे पर कुछ बदला बदला सा, अरे!ये क्या तेरी आँखें इतनी क्यों सूजी हुई हैं?समझ गई,मैडम ने रात भर जम के पढ़ाई की है, उसकी सहेली एक सांस में सब कह गई और वो उस दिन सिर्फ मुस्कुराभर दी।सोच रही थी कि क्या बताऊँ की ये आंखें क्यो सूजी है, कैसे बताऊं कि इस हँसते मुस्कुराते चेहरे का भाग्य कैसा है।कैसे बताऊं की ये आँखों की सूजन पढ़ाई ने नहीं अपनो के तानों ने दी है।कैसे बताऊं कि पढ़ाई ने नहीं रात भर की रुलाई ने आँखें सुजाई है।कैसे बताऊं कि ये कॉलेज की रौनक अपने घर पर पड़ने वाली काली परछाई मानी जाती है।कैसे बताऊं कि अपनों पे बहुत बड़ा बोझ हूँ,घर की अशांति हूं, रोटियां तोड़ने वाली हूँ।मनहूस हूँ।लड़के की ख्वाहिश में होने वाली तीसरी लड़की हूँ।
अरे !कहाँ खो गई,सहेली ने उसे झकझोरा।तो वो बस यही कह पायी की इसमे मेरा क्या कसूर कि मै एक लड़की हूँ,लड़के की ख्वाहिश में हुई अनचाही औलाद।यह कहते हुए वह आगे बढ़ गई और सहेली सोचती रह गई किये आज वो किस से मिली।।
#विनोदी