जज़्बात
क्या कभी पूरी होगी मेरी, वो अनकही, अधुरी बात ?
क्या होगी फिर से एकबार जिवन मे आपसे मुलाकात ?
अनकही, अनसुनी वो प्यार से भरपुर बात;
जो लब पे कभी आई नही, वो अनकही बात !
जो कह नही सका आपको, वही प्यार की बात
आँखे कहती थी मेरे दिल मे छुपे जज़्बात
पर आपने अनसुनी कर दी मेरे दिल की बात !
पल दो पल की थी वो मुलाकात; अब है लम्बी जुदाई की रात
इतने खुशनसीब हम कहाँ, जो समज जाते आप मेरे जज़्बात
काश मैं कह पाता आपको मेरे दिल की बात, या दिखा सक्ता मेरे जज़्बात ।
Armin Dutia Motashaw