अरे नदी तुम अद्भुत सुन्दर
बहती जाओ रूको नहीं तुम,
बच्चों जैसी दौड़ लगाओ
पवित्र तीर्थों पर हमें बुलाओ।
मछली का तुम घर बनाओ,
ठंडा पानी हमें पिलाओ,
शस्यश्यामला धरा तुम्हारी
देखरेख की आवाज लगाओ।
छ ऋतुओं की कथा सुनाओ
अपने जल में हमें मिलाओ,
जिस गाँव-शहर से तुम निकलो
उन्हें शुद्धता का पाठ सिखाओ।
(बच्चों के लिए)
* महेश रौतेला