ओ चांद
शिकायत करती हूँ मै तुझसे कई बार ;
क्या देता है तू उन्हे मेरा भेजा हुआ प्यार ?
क्या पहुचाता है मेरा संदेश तू उनको, मै यह जानू ना।
दिल की बाते दिल में छुपा के बैठी हूँ मै;
उन्के प्यार में खो गया है दिल मेरा, मुझे है ले डुबा;
सिर्फ तू ही जानता है, जो कहती नही यह जुबां ।
क्या सुनाता है तू उन्हे मेरी फरियाद ?
क्या वो भी करते है मुझे कभी कभी याद ?
इतना जरा बता जा, बादलों में छुप जाने से पहले
जब वो लौटे, तो आना तू , लेकर संदेश उन्ह्से पहले ।
क्या वो भी भेजते हैं संदेश या करते है तुझसे बात ?
क्या मेरी तरह वो भी ज़न्ख्ते है मुलाकात ?
Armin Dutia Motashaw