भीड़ वाले जिंदगी की अकेली राह पर
एक बच्ची की दास्तान
जालिम दुनिया पर की जिसने अपनी जिंदगी कुर्बान
बन सकती थी वह भी रजिया सुल्तान
पर इस लोभी दुनिया ने छीन ली
जिसकी जान।
एक राह कई पत्थर
हर जगह धतूरे कहीं इत्र
न हिंदू, न मुस्लिम ,न सिख, न इसाई
एक जान कई कसाई
जिजीविषा जिसने की कुर्बान
उस नन्हीं बच्ची की दास्तान
माँ नहीं तो बेटा कहाँ
ममता नहीं तो इंसानियत कहाँ
दिल नहीं तो कहाँ है जान
उस नन्ही बच्ची की दास्तान
-अभिनव आकाश