कोरोना
हर कोई भयभीत है ,हाथ मे तलवार ले ,
दुश्मन न दिखता है मगर, शान्त है सारा शहर|
आज ही जीवन बचा है , दैव ने यह क्या रचा है,
बाहर लगाये घात है , लेने को प्रतिकार है |
थे बहुत हम गर्व मे , श्रृष्टि के संदर्भ मे,
क्षुद्रता की भावना ,थी मगर शुरूआत ये|
शक्ति ले वह क्षुद्र मे , सामने अब युध्द में,
छिप गये जो गर्व थे , हाथ मे तलवार ले|