रास्ते मे बहुत गड्ढे हैं तो क्या हम कदम ही न रख्खे?
बिना जोखिम के मिलता है क्या जीवन? बात सफलता की भला कैसे करें ?
कुछ सवालो के जबाव सवाल ही होते है ?अरे कुछ तो बताए नीव कैसे रख्खे?
मिलती नही जिन्दगी इतनी आसानी से , चलो सहेजते हैं ! मगर मौत से पर्दा भी भला कैसे रख्खें?