हर एक शब्द के हर एक अक्षर में, तुम्हे हूं लिखता हूं
तनहाई के हर एक लम्हे में, तुम्हे हूं तो सोचता हूं
लाख मनाऊ खुद को की प्यार नहीं था मूजको
पर हर बार इन्हीं ख़यालो में तुम्हे ही तो देखता हूं
हसी से भागना चाहता था में, तुम्हे देख कर हर लम्हा मुस्कुराता हू
इश्क़ नई बता मुझे क्या है ये, आखिर क्या है ये
सामने मौत हो, ज़िन्दगी के बस दो पल बचे हो, सांसे थम सी गई हो
इस पल के हर एक लम्हे में तुम्हे ही तो मुस्कुराता पाता हूं