राष्ट्र प्रेम
चल उठ नवयुवा, अज्ञानता के द्वार पर तु ताला जोड़ जा।
ठान के नव संकल्पों को तु जागृति का पथ खोल जा।
छोड़ चला असिद्धि का मार्ग, अब मातृभूमि तुझे पुकार रही।
कर कैसे अनुकरण सिद्धांत अच्छाई का, आज तुझसे वह बतला रही।
घट में आध्यात्म लिए, ध्यान में माँ भारती को लिए, नूतन विचारों का दीपक जलाएं।
आओ मिलकर हम नवयुवा अब अपना सुदृढ़ भारत बनाएं।
कर प्रहार नैतिक पतन पर, दरिद्रता को कुचलकर, नूतन विचारों का दीपक जलाएं।
आओ मिलकर हम नवयुवा अब अपना सुदृढ़ भारत बनाए।
अपने जन्मभूमि की मिट्टी मे खुद को अवशोषित कर, राष्ट्र को विश्व में शिखर पर पहुँचा कर, नूतन विचारों का दीपक जलाएं।
आओ मिलकर हम नवयुवा अब अपना सुदृढ़ भारत बनाएं।
- एकता रंगा
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