मेरे दाता, मेरे अन्नदाता
तु खिलाता, तो मैं जीता।
तु न उगा पाये अनाज।
कैसे बिताये ये (दिन)आज।
बरसे न बरखा सूखा चारोंऔर।
कब बरसे बादल, बरसे घटायें घनघोर ।
तु न सुखी, तो कैसे हम सुख पाये।
जीवन का सही अर्थ तुही बताये।
हे भगवान थोडी कृपा बरसाये।
हमारे किसानदादा को नवजीवन
दिलायें।
#सूखा