हे विश्व गुरु हे ज्ञान पुंज हे धर्म प्राण हे सुख सागर
हे रत्नाकर हे गुण सागर सब दीनों के करुणासागर
धन्य सभी वो जीव लिया है जन्म यहांआश्रय पाकर
ज्ञान पिपासु हो तृप्त यहां गढ़ते नूतन विचार आकर चहुंओर बढ़ाते कीर्ति सदा कर्मवीर बनते तपकर देशभक्ति का जोश जहां छलके हिलोरें ले लेकर
तब क्यूं येभूमि न गर्वित होआशीष लुटाए मुस्काकर
है कमी नहीं रणवीरों की चंडी भी ललकारें जाकर
भारत भूमि सदा वंदित तेरा यश अक्षय और अमर
जी सका नहीं कभी भी जो रखे जरा भी टेढ़ी नजर
#जिज्ञासु