कौन सी कला ..
सोचता हूं कि
कौन सी कला समझूं सीखूं मैं
कौन सा काम करूं मैं ?
कोई पाक कला का माहिर
कोई वाक कला का माहिर
कोई चित्रों में है रंग भरता
कोई जीवन के दुख हरता
कोई खेले सब खेल निराले
कोई अजब से काम संभाले
कोई हाथों से नव निर्माण करे
कोई जन तन मन में प्राण भरे
मैं तो बस चाहूं कि
जो भी कला मैं समझूं सीखूं
नहीं चढ़े कूदे वो मेरे ऊपर
रखे सदा जो मुझको भू पर
छू कर जन जन के मन को
दूर हटाए सब अंतर तम को
तेरे मेरे से हटकर -जोड़े हम को
#कला