हम जंगली थे तभी ठीक था क्योंकि उस समय हम प्रकृति को अपनी माता समझते थे और प्रकृति की पूजा किया करते थे जैसे ही थोड़ा सभ्य क्या बने प्रकृति को रौंदना शुरू कर दिया हवा में विष घोलना शुरु कर दिया पेड़ों को काटना शुरू कर दिया ईश्वर की वंदना कम आडंबर को बहुत महत्व दिया मुझे तो लगता है हम पहले ही ठीक थे हमारे पूर्वज हमसे कहीं अधिक उन्नत थे मुझे ऐसा लगता है कि कहीं ना कहीं हमारा विकास हमें पतन की ओर उन्मुख कर रहा है चाहे वह कारोना हो या हमारी संस्कृति सबका चारों तरफ से पतन नहीं हो रहा है।प्रकृति की ओर चलो नहीं तो कोरोना हमें नहीं छोड़ेगा शायद यही है संदेश प्रकृति का ।
#जंगली