किताबें करती है बातें बीते जमाने की
चलो पढ़ते हैं कुछ किताब कुतुबखाने की
तुम जो पढ़ लो एक दफा दाग़ को
तो तुम्हें जरूरत ही ना पड़े शराब और मयख़ाने की
पढ़कर अमृता प्रीतम को ऐसा लगा
आशिकी चीज नहीं आशिकी दिखाने की
जब पड़े कुछ गीत शिव बटालवी के
ख्वाहिश बची ही नहीं कुछ पाने की
#आजाद