सुदंर रचना मेरी कलम से ..
हर बात का कोई जवाब नहीं होता ।
हर इश्क का नाम खराब नहीं होता ।।
यूं तो झुम लेते है नशे में पीने वाले ।
मगर हर नशे का नाम शराब नही होता ।।
किसी को रुप का नशा है ,किसी को धन का नशा हैं ।
किसी को वैभव का नशा है ,किसी को पैसे का नशा है ।।
यहाँ हर आदमी किसी ना किसी नशे मे झुमता है ।
खामोश चेहरे पर हजारो पहरे होते है ।।
हंसती आँखो में भी जख्म गहरे होते है ।
जिनसे अपने रुठ जाते है उनके दिल वीरान हो जाते है ।।
हर इंसान का दिल बुरा नही होता ।
बुझ जाते है दीप कभी तेल की कमी से ।।
हर बार कुसुर हवा का नहीं होता ।
धरती पर जो नही चलते हवा में उडते है ।
उन लोगों का नशा किसी से कम नहीं होता ।।
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