*एक मुद्दत से आरज़ू थी*
*फ़ुर्सत की .,*
*मिली तो इस शर्त पे कि*
*किसी से ना मिलो ..!!* 🤔🙏
*शहरों का यूँ वीरान होना कुछ यूँ ग़ज़ब कर गया ...*
*बरसों से पड़े गुमसुम घरों को आबाद कर गया ...!!!*
*घर गुलज़ार., सूने शहर.,*
*बस्ती-बस्ती में कैद हर हस्ती हो गई .,*
*आज फिर ज़िन्दगी महँगी*
*और दौलत सस्ती हो गई .....!!!*
#Er_Mik