सुदंर रचना ,शब्द .नजर ...
नजर वात्सल्य की हो तो ,दिल में ममता जगाती हैं ।
नजर प्रेम की हो तो ,दिल में प्यार जगाती हैं ।।
नजर क्रोध की हो तो ,दिल में आग लगाती हैं ।
नजर नफरत की हो तो ,तबाही मचाती हैं ।।
नजर करुणा की हो तो ,दिल में दयालुता पैदा करती हैं ।
नजर खोज की हो तो ,नया आविष्कार करती हैं ।।
नजर कजरारी हो तो ,दिल को धायल करती हैं ।
नजर अनुभवी हो तो ,दिल में यादें ताजा करती हैं ।।
यह संसार सारा नजरों का कायल हैं ।
हर दिल नजर का आशिक है ,हर दिल नजर का पारखी हैं ।।
नजरों के पारखी ही इस जहां में नया इतिहास रचते हैं ।
यहाँ हर कोई नजरों नजरों का कर्ददान हैं ।।
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