अपनी प्रेमधुन में हो मगन, कृष्ण की दिवानी हो गई।
सर्वस्व अर्पण कर दिया, सांवरे की रानी हो गई।।
मन में मूरत बसाकर ,मंदिर सी पावन हो गई।
धूप शीत बरसात क्या , सब मासों में सावन हो गई।।
विषपान कर भी भक्ति की, अविरल सुधा बनकर बही।
बताकर प्रेम की शक्ति , कहा वो भी जो रह गई थी अनकही।।
#अनकहा