विशाल है भारत
अपनी भाषा का सरताज है भारत,
गंगा की लिखावट है भारत
हिमालय का निवास है भारत।
नदियों का प्रवाह है भारत
वृक्षों का सौन्दर्य है भारत,
शब्दों का श्रृंगार है भारत,
ऋतुओं का परिष्कार है भारत।
संस्कृति में नमस्कार है भारत
सभ्यता में स्नेह है भारत,
चलने का आह्वान है भारत
जन-जन का स्वाभिमान है भारत।
**महेश रौतेला