अचानक जब मुझे ये एहसास होता है कि मैं तुम्हारी हूँ, तो मैं खुद पर बहुत गुरूर करने लग जाती हूँ। पैर ज़मीं पर नहीं होते हैं। बहुत खुशकिस्मत होने का एहसास होता है। तुम्हारे साथ होने के सपने देखना और उनको पूरा करने की ज़िद, सब कुछ होता है....
लेकिन, दूसरे ही पल ये ख्याल आता है कि मैं तुम्हारी नहीं हूँ, तुमने कभी मुझे अपना नहीं कहा। ये तो मेरे ख्यालों की दुनिया है। जिसमें मैं तुम्हारी होती हूँ। और खुद पर ही हँसी आती है। क्योंकि मेरे ये ख्याल , ये सोच बहुत ग़लत है। तुमने कभी कुछ ऐसा नहीं कहा मुझसे, ऐसा कोई वादा नहीं किया। जिससे मुझे तुम्हारी ज़िन्दगी में खुद के खास होने का एहसास हो। तुमने कभी मुझे इस तरह नहीं देखा कि मैं जिसे मोहब्बत समझ लूँ। तुम तो औरों की तरह ही पेश आते हो, कुछ खास नहीं होता। कुछ ऐसा नहीं होता जो सिर्फ मेरे लिए हो। लेकिन फिर भी मैं खुद को तुम्हारे हो जाने का एहसास दिलाती हूँ......।
हां एक दिन मैं खुद को तुम्हारी नज़र से देखना चाहती हूँ। देखना चाहती हूँ कि तुम मुझमें क्या देखते हो ? क्या कुछ ऐसा भी है जो तुम मुझमें पसंद करते हो ? क्या तुम भी मुझे पाना चाहते हो ? क्या मेरे ख्याल तुम्हें सोने नहीं देते ? क्या तुम भी मुझसे मोहब्बत करते हो......?
#रूपकीबातें