# काव्योत्सव २.०
विषय: प्रेम/ईश्वर
शीर्षक: नैणां बावरे
नैणां बावरे
नैणां बावरे बावरे बावरे हैं
तुझे ढूंढते फिरे
मेरे सांवरे सांवरे सांवरे की
छवि ढूँढते फिरे
तेरे प्यार के दीदार की ये प्यासी तेरी
मेरे काळीया हे! सुन ले मेरी
ओ मेरे लल्ला......
करेंगा कब न्याल मेरी
अखियाँ को दरश करा के
ओ मेरे लल्ला......
करेंगा कब ख़्वाब पुरे
दिल को सुकून दिलाके
सताए मुझे क्यूँ
रूलाए मुझे क्यूँ
यूँ ही दूर बैठे मुखड़ा छिपाके
ओ मेरे लल्ला......
करेंगा कब न्याल मेरी
अखियाँ को दरश करा के
तुझे दिल में बसा के रखूँ
पलके बिछा के रखूँ, सुन ले सदा
अपना बनाले, जिऊँ तेरे लिए
तेरे लिए कान्हा
ना पाऊँ सह दूरियाँ....हाये
तुझे दिल में बसा के रखूँ
पलके बिछा के रखूँ
सुन ले सदा
अपना बनाले, जिऊँ तेरे लिए
तेरे लिए कान्हा
ना पाऊँ सह दूरियाँ
ये जीना क्या मेरा?
तू सपना मेरा
बस नैणां की तरस छिपा दे
ओ मेरे लल्ला......
करेंगा कब न्याल मेरी
अखियाँ को दरश करा के.....
-देवांशु पटेल