माँ मेरी... Kavyotsav 2
माँ मेरी किताबो की दुकान थी।
हर समस्या का हल था उसके पास,
हर सवाल का जवाब थी,
माँ मेरी किताबो की ...........
हर मरज का ईलाज था उसके पास,
हर दर्द की दवा थी,
माँ मेरी किताबो की दुकान थी।
संस्कृति और सभ्यता का ज्ञान था उसको,
संस्कारों की खान थी
माँ मेरी किताबो की दुकान थी।
संबंधों को जानती थी वो,
अपनो की पहचान थी।
माँ मेरी किताबो की दुकान थी।
स्वाद था उसके हाथो में,
पकवानो की जान थी।
माँ मेरी किताबो की दुकान थी।
भरती थी वो सब की झोली,
अन्नपूर्णा का रुप थी।
माँ मेरी किताबो की दुकान थी।
सीख थी उसकी बातो में,
सच्चाई की राह थी।
माँ मेरी किताबो की दुकान थी।
डाट में उसके चिंता,
ममता का आधार थी।
माँ मेरी किताबो की दुकान थी।
जो चाहो उनसे सीखलो,
ज्ञान का वो भण्डार थी।
माँ मेरी किताबो की दुकान थी।
uma vaishnav
( surat)