आओ जलाएं एक दीया विश्वास का
कुछ तो होगा दूर अंधेरा
कितनी भी हो लंबी रात , हर रात का अंत सवेरा
इस छोटी सी आस का ।
आओ जलाएं एक दिया विश्वास का.......
भले ही इस लौ की गरमी से
नहीं सिकेंगे ज़ख्म किसी के ,
भले किसी के जीवन का अनवरत अंधेरा
एक बूंद की इस ज्योति से नहीं उजाले में बदलेगा
पर जब लाखों दीयों की लौ इक साथ जलेगी
नहीं अकेले नहीं हैँ हम,कोई हमारे साथ तो है
फैलेगा उजियारा इस एहसास का
आओ जलाएं एक दिया विश्वास का.......