#KAVYOTSAV -2
मन में उभरता एक सवाल हूँ
शांत हूँ, उन्माद हूँ
बेचैन, बदहाल
हूँ आंधियों से लड़ता , एक इंसान हूँ
तुम्हारी तरह !
न फरमानों कि महफिल कि शान हूँ
बेखौफ हूँ, बदनाम हूँ
परेशान , अनसुलझा हूँ
रक्त से सींचता वतन , एक फौलाद हूँ
तुम्हारी तरह !
गीत गाता एक मुसाफिर हूँ
शून्य हूँ , सम्पूर्ण हूँ
मंजिल - ए - राह , दु:खद
हूँ संघर्ष का गाता गीत , एक जीत गान
हूँ
तुम्हारी तरह !
सूर्य से बिछड़ी एक किरण हूँ
पर आस हूँ , विश्वास हूँ
भटकता , लड़खड़ाता
टूटते सपनों का , एक संसार हूँ
तुम्हारी तरह !
बंधते उम्मीदों की एक गांठ हूँ
वृद्ध हूँ , बीमार हूँ
अखण्ड , अथक हूँ
अविस्मरणीय गाथा हूँ
जर्जर रिश्तों के घर की , एक दीवार हूँ
तुम्हारी तरह !