जाने कहाँ गये वो दिन, कहते थे तेरी राह में
नज़रों को हम बिछायेंगे
चाहे कही भी तुम रहो, चाहेंगे तुम को उम्रभर
तुम को ना भूल पायेंगे
मेरे कदम जहाँ पड़े सजदे किये थे यार ने
मुझ को रुला रुला दिया जाती हुई बहार ने
अपनी नज़र में आज कल दिन भी अंधेरी रात है
साया ही अपने साथ था, साया ही अपने साथ है
कल खेल में हम हो ना हो, गर्दिश में तारें रहेंगे सदा
भूलोगे तुम भूलेंगे वो, पर हम तुम्हारे रहेंगे सदा
रहेंगे यही अपने निशाँ, इस के सिवा जाना कहा
जी चाहे जब हमको आवाज दो, हम हैं वही हम थे जहाँ
अपने यही दोनों जहाँ, इसके सिवा जाना कहाँ
- अग्नात