Hindi Quote in Story by Archana Singh

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स्वाभिमानी
साक्षी मध्यम वर्गीय परिवार से थीA उसकी दो बड़ी बहनें पढ़ने में अच्छी थीं। माता&पिता व अध्यापक तक सभी साक्षी की तुलना दोनों बहनों से करते थें। अड़ोसी-पड़ोसी व्यंग्य कसा करते थे किंतु वह अपना मनोबल कायम रखती थी। साक्षी की रुचि नृत्य में थी]विद्यालय के किसी भी समारोह का प्रारम्भ उसकी नृत्य गणेश वंदना या सरस्वति वंदना से होती थी। बारहवीं करने के पश्चात् वह दिल्ली में चाचा जी के यहॉं अपनी नृत्य कला में दक्षता हासिल करने आ गई। इस तरह साक्षी का नया सफ़र आरंभ हुआ।
वक्त बीतता गया] साक्षी एक महान कलाकारा के रुप में निखर कर सामने आई। अख़बारों व दूरदर्शन पर भी उसकी चर्चा होने लगी। साक्षी को मुख्य मंत्री के द्वारा अवार्ड से सम्मान भी प्राप्त हो चुका था। कई वर्षों पश्चात् साक्षी अपने ही शहर में आयोजित ^इंटर स्कूल डांस प्रतियोगिता’को जज करने के लिए पहुॅची ही थी कि तभी उसकी मुलाकात अकस्मात ही पत्रकार आदित्य से फिर हो गई। हॉं]यह आदित्य वर्मा वही था जिसने विवाह के लिए नृत्य छोड़ने की शर्त रखी थी।
आदित्य के कथन ने साक्षी के स्वाभिमान को ठेस पहुॅचाई थी। साक्षी ने भी उस समय कहा था कि उसे उसी प्रकार स्वीकार करना होगा] नृत्य उसकी ज़िंदगी है जिसके बिना वह स्वयं की कल्पना भी नहीं कर सकती। साक्षी को ये समझते देर नहीं लगी थी कि आदित्य का प्यार सच्चा नहीं है। बस उसी पल से दोनों के रास्ते अलग हो गए थे और आज समारोह में एक अज़नबी के भॉंति ही दोनों पेश आए। वह स्वाभिमानी थी] आत्मसम्मान के साथ जीना चाहती थीA
----------- अर्चना सिंह जया

Hindi Story by Archana Singh : 111129149
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