मैंने लिखा कैसे हो?
तुमने लिखा अच्छी हूँ,
फिर उसे मिटा दिया,
फिर लिखा,
ठीकठाक हूँ,
और उसे भी मिटा दिया।
फिर थोड़ी देर सोचा
और लिख डाला-
खुश हूँ,
बीता समय याद आ गया है,
लम्बी बातें छोटी लग रही हैं,
खेतों पर नजर घूमती है,
आकाश से रिश्ता बना हुआ है।
जंगल हरे भरे दिख रहे हैं,
प्यार में दुर्घटना नहीं होती है,
चाय की घूँटों में मिठास है,
पेट भरा हुआ है,
विचार भी मन में आ रहे हैं,
विद्यालय के पास बच्चे खेल रहे हैं,
पक्षियों के घोंसले सुरक्षित हैं,
बहुत खुश हूँ।
** महेश रौतेला