*?शिक्षा जगत समाचार?*
*जापान में परीक्षा से पहले प्रिंसिपल ने बच्चों के पैरेंट्स को एक लेटर भेजा जिसका हिन्दी अनुवाद इस प्रकार है :-*
*डियर पैरेंट्स*
मैं जानता हूं आप इसको लेकर बहुत बेचैन हैं कि आपके बच्चे *इम्तिहान में अच्छा प्रदर्शन करें*
लेकिन ध्यान रखें कि यह बच्चे जो इम्तिहान दे रहे हैं इनमें भविष्य के अच्छे *कलाकार* भी हैं जिन्हें गणित समझने की बिल्कुल जरूरत नहीं।
इनमें बड़ी बड़ी कंपनियों के *प्रतिनिधि* भी बैठे हैं, जिन्हें इंग्लिश लिटरेचर और इतिहास समझने की जरूरत नहीं है।
इन बच्चों में भविष्य के बड़े-बड़े *संगीतकार* भी हैं जिनकी नजर में केमिस्ट्री के कम अंकों का कोई महत्व नहीं।
इन सबका इनके भविष्य पर कोई असर नहीं पड़ने वाला इन बच्चों में भविष्य के *एथलीट्स* भी हैं जिनकी नजर में उनके मार्क्स से ज्यादा उन की फिटनेस जरूरी है।
लिहाजा अगर आपका बच्चा ज्यादा नंबर लाता है तो बहुत अच्छी बात है लेकिन अगर वह ज्यादा नंबर नहीं ला सका तो तो आप बच्चे से उसका *आत्मविश्वास और उसका स्वाभिमान ना छीन लें।*
अगर वह अच्छे नंबर ना ला सके तो आप उन्हें *हौसला दीजिएगा की कोई बात नहीं* यह एक छोटा सा इम्तिहान है।
*वह तो जिंदगी में इससे भी कुछ बड़ा करने के लिए बनाए गए हैं।*
अगर वह कम मार्क्स लाते हैं तो आप उन्हें बता दें कि आप फिर भी इनसे प्यार करते हैं और आप उन्हें उन के *कम अंको की वजह से जज नहीं करेंगें।*
ईश्वर के लिए ऐसा ही कीजिएगा और जब आप ऐसा करेंगे फिर देखिएगा कि आपका बच्चा *दुनिया भी जीत लेगा।*
*एक इम्तिहान और कम नंबर आपके बच्चे से इसके सपने और इसका टैलेंट नहीं छीन सकते।*
*और हां प्लीज ऐसा मत सोचिएगा कि इस दुनिया में सिर्फ डॉक्टर और इंजीनियर ही खुश रहते हैं*
(यह सब तो क्लब 99 की रेस में लगे घोडे हैं)
"अपने बच्चों को एक अच्छा इंसान बनने की शिक्षा दीजियेगा।
केवल अंक ही बच्चों की योग्यता का मापदंड नही।
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