ओ शब्द:
ओ शब्द तू मेरे पास था
वर्षों तक हिलता-डुलता
मैंने कब तुझे पहिचाना
पता नहीं।
भारी उथल पुथल के बाद
जब मैं शान्त हुआ,
एक जंगल में जा, लेट गया
संज्ञा हीन सा
जंगली जानवरों ने मुझे उलटा- पलटा,
पर मुझे मरा समझ छोड़ दिया।
लेकिन मैं मरा नहीं था
तू मेरे अन्दर था
खलबली मचा रहा था,
बाहर आने के लिए तड़पता
मेरी आत्मा तक पहुंच रहा था।
- महेश