बच्चे सोचते हैं
बच्चे सोचते हैं-
माँ कभी बीमार नहीं होती
उसके घुटनों में दर्द नहीं होता
हाथ नहीं दुखते
शरीर थकता नहीं,
वह घंटों जो कहती है
वह व्याख्यान होता है।
माँ कहती है-
"सज अपने घर में आती है"
माना वह पहला प्यार हो।
बच्चे सोचते हैं-
पिता के पैसे कभी खत्म नहीं होते
उसके कंधे कभी नहीं झुकते।
**सज- आराम/मन लगना!
** *** महेश रौतेला