दिल की किताब
धूल खाती सीने में कहीं पड़ी थी दिल की किताब,
फ़ुरसत मिली तो आज थोड़ी पढ़ ली दिल की किताब |
उम्मीदों से रौशन हुआ पहला पन्ना किताब का,
बचपन के सुनहरे लम्हों से सजी थी दिल की किताब |
क्या ख़ूब जवां हसरतों को संजोये पड़ी थी दिल की किताब |
बेताबी से लिखी थी कभी,आज खोल दी दिल की किताब |
मायूसी से भरे थे कई फ़ज़्ल किताब के,
रिश्तों ने जब करवट बदली, सहम गयी तब दिल की किताब |
खून से सदे थे कई पन्ने प्यार के,
अपनों के ही घाव से घायल हुई थी दिल की किताब |
अंत तक पढ़ना हैं यह ठान ली थी आज मग़र,
अंत किसका ? खुदका या किताब का ?
यह जान ना पायी दिल की किताब