समाज की दृष्टि और आप का अस्तित्व
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इस कम्पीटिशन और लोभ के दौर में जो भी लोग बहारी स्वरूप , बातचीत और अपने आप को प्रस्तुत करने के ढंग में दूसरे लोगों को प्रभावित नहीं कर पाते , वह काबिल होते हुए भी सामाजिक मानकों में "सामान्य" लोगो के साथ नहीं जुड़ पाते। आत्मविश्वास,कपड़े की चोइस, हावभाव ,आपकी चाल, आपकी आँखों की चमक और आपकी अपनी कमजोरियों ,खूबियों और महारथ का आंकलन किया जाता है, इसका कारण के आज हम लेन देन के बड़े बाज़ार का एक छोटा सा हिस्सा है। जहां आप की सेवाओं को बाद में, पहले आप का मूल्यांकन किया जाता है।
ऐसा नहीं है कि लोगों को सेवा और वस्तु की आवश्यकता नहीं है, परन्तु लोगों के पास विकल्प और विविधताएं बहुत है। आज लोग रेस्टोरेंट और बार्बर शॉप को भी बार बार बदल रहे है।
ऐसे वक्त में आप का अस्तित्व एक नई और रचनात्मक योग्यता ,ईमानदारी,विश्वसनीयता और मूल्य आधारित निष्ठा का स्रोत हो, एवं नई पद्धतियों को स्वीकार करने में आप का हृदय खुला हो , यह आज की आवश्यकता है। सेवा के नियमों और पैसों के मामले में व्यहवारिक स्पष्टता और सरलता आज के समय की सब से बड़ी एसेट है।