मैं और मेरे अह्सास
दूर रह कर
दूर रह कर जीने का हौसला बढ़ा रहा हैं l
जमकर जिंदगी का ज़ज्बा चढ़ा रहा हैं ll
हररोज नई नई खुशियां की महफ़िल में l
सुबह शाम को रंगीन मोती लगा रहा हैं ll
खूबसूरत हसीन दुनिया बनाने के लिए l
दिन रात चांद सितारों से सजा रहा हैं ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह