"आफ़रीन"
आफ़रीन तेरे लहजे पे, हर इक बात आफ़रीन,
ये अदा, ये नज़रों के तुम्हारे बयानात आफ़रीन।
वो दिन जो गुज़रते थे महज़ गुफ़्तगू में ऐ जानाँ,
वो दिन भी आफ़रीन थे, वो हर रात आफ़रीन।
तेरे क़दमों से ही रौशन हैं मेरे रास्ते तमाम,
तू जो संग है तो लगती हैं हयात आफ़रीन।
तेरी हर अदा पे दिल कहे बार-बार आफ़रीन,
ये शोख़ियाँ, ये तबस्सुम, ये इशारात आफ़रीन।
तेरी खुशबू से महक उठती हैं ये तन्हा फ़िज़ाएँ,
तेरी यादों से सजे हैं मेरे जज़्बात आफ़रीन।
"कीर्ति" अब और क्या लिखे तेरी तारीफ़ में,
तेरा ज़िक्र आए तो बनते हैं नग़्मात आफ़रीन।
Kirti Kashyap"एक शायरा"