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उलझनों में फँसा मुसाफ़िर था, रास्ता न मिला... चीख़ता रहा दुनिया से, पर अपना ही साया न मिला.... खुद को साबित करता रहा हर एक मोड़ पे, हर जगह.... लोग मिले बहुत से मगर दिल का हमसाया न मिला.... दर्द की आग में जलता रहा मैं हर एक रोज़.... तकलीफ़ों से लड़ते-लड़ते कोई सहारा न मिला.... भीतर ही भीतर बिखरता रहा ख़ामोशी के साथ.... हँसता रहा चेहरों में, पर मन का साया न मिला.... फिर धैर्य का हाथ थामा, मन को ठहरने दिया.... चुप रहना सीखा जब शोर में कुछ फायदा न मिला... ना हर किसी को जवाब दिया, ना खुद को साबित किया.... जो सुकून चारों ओर ढूँढा, वो बाहर न मिला.... आख़िर झुककर देखा जब अपने ही अंदर “ये मुसाफ़िर”... जिसे उम्र भर खोजता रह दर बदर, वही खुद में ही मिला..... –संकेत गावंडे .
Train are moving fast on a track, And my heart beats faster than that.... The journey gives me inner peace, And my mind is just on pause..... No more thoughts, no more dreams, Just absolute and pure nothing...... The chill wind coming through the window, With beautiful and mesmerizing sunlight.... The beauty of glorious nature shines, That makes my life smile..... I am waiting here to meet, One of my new destiny's points... With all the good hope and a curious mind... With all the good hope and a curious mind...
🍂🥀🖋️
on last weekend when I was wondering near the beach ...I swa one girl who is seating on rock Alone and just staring towards the ocen and that beautiful sunset maybe see is in deep thought and suddenly this line come in my mind so I note it down....... ......... मैं भी सोचूं, समंदर आज इतना शांत सा क्यों लग रहा है, लहरें भी आज चुप हैं, जैसे किसी की बात सुन रही हैं… शायद… कोई आया है इससे मिलने, कोई जो खुद भी समंदर सा गहरा है, जो जज़्बातों का सैलाब है, और खूबसूरती का एक बेमिसाल दरिया है… हवा भी धीरे से चल रही है, जैसे उसके कदमों की आहट सुन रही हो, रैत भी रुक सी गई है एक जगह, जैसे उसके नर्म पाँव का एहतराम कर रही हो… वो जो आया है, शायद अपनी तन्हाई को छोड़ने, अपने बातों को बयां करने, या फिर समंदर से ये कहने, कि उसके दिल में भी अब एक तूफान सा उठ रहा है... जज़्बातों का बवंडर बढ़ रहा है... यूँ तो समंदर तू शांत सा दिखाई दे रहा है, लेकिन अंदर कहीं तेरे भी एक लहर सी उठ रही है… जैसे समंदर भी उसके ग़मों से बेचैन हो, जैसे उसके ग़मों को अपनी गहराइयों में छुपा लेना चाहता हो… आज समंदर और वो, दोनों एक जैसे से लग रहे हैं… एक गहरा, एक बेचैन… एक शांत, एक उदास… एक-दूसरे को समझने की कोशिश करते दोनों साथ… और मैं सोचता रहा, आज समंदर इतना शांत सा क्यों लग रहा है… आज समंदर इतना शांत सा क्यों लग रहा है… _Sanket.
Dhundana chaho to yaha har yek kisso me khushi hai, har yek lamhe me khushi hai, bat itni si hai hame bas, yek kadam aage badke use hame apnana hai..... spread Smile😃 spread Kindness❤️
thought....
वक़्त वक़्त वक़्त.... वक़्त के साथ हर बात पुरानी हो जाती है, वक़्त में ही हर एक कहानी छुप जाती है। वक़्त ही वो है, जिसमें नज़दीकियां बढ़ जाती हैं, और वक़्त अगर ना मिले, तो दूरियां आ जाती हैं। वक़्त की ही तो बात है, जहां ज़माना बदल जाता है। वक़्त की ही तो बात है, जहां कोई गरीब से अमीर, और अमीर से गरीब बन जाता है। वक़्त वो है जिसमें बचपन जिया जाता है, और यही वो वक़्त है जिसमें जवानी से बुढ़ापे का सफ़र गुज़र जाता है। कहीं पहुंचे या ना पहुंचे, यह वक़्त हर जगह पहुंच जाता है। यार से लेकर प्यार तक, और प्यार से लेकर परिवार तक, यह वक़्त ही है जो हर नाते को बांधता चला जाता है। कोई वक़्त से वक़्त निकालकर आता है, और कहीं कोई वक़्त, किसी और को वक़्त देता है। यह वक़्त ही अनसुलझा सा सुलझा है, इसे सुलझाने की कोशिश में भी यह कमबख्त वक़्त ही चला जाता है। - संकेत
"We wander lost in the maze of our reality, unaware it might be the crafted playground of another's game in the vast expanse of the universe....." - Sanket Gawande
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