थक चुकी हूं सोना चाहती हूं। थकावट
कविता
क्या आज रहने दोगी
अगर कुछ ना लिखोगी तो चलेगा
क्या आज रहने दोगी
अगर कुछ ना सोचो कि तो चलेगा
क्या आज रहने दोगी
आज आराम करोगी तो चलेगा
आज थोड़ा जल्दी सो जाओगी तो चलेगा
क्या चलेगा तुम्हें आज दिन का बेवजह जाना
क्या चलेगा तुम्हें
खुद को आज बस आराम देना
क्या चलेगा तुम्हें
आज कुछ भी ना सोचना
क्या चलेगा तुम्हें
आज लिखने का बोझ अपने सर पर ना लेना
बताओ क्या चलेगा तुम्हें
थोड़ा खुला महसूस करना
हां तो आज रहने दो
बस आंखें बंद करो
और सो जाओ
आज कुछ न करने से
दुनिया खत्म नहीं हो जाएगी तुम्हारी
आज कुछ ना सोचने से
वजूद मिट नहीं जाएगी तुम्हारी
बस रहने दो
इस पल को
यही छोड़ दो
और दूसरे पल में आराम करो
मत सोचो कि सब कुछ छूट गया
आज का दिन बेकार गया
मत सोचो कि तुमने कुछ नहीं किया
मत सोचो कि तुम्हें बहुत कुछ करना था
मत सोचो कि
तुम्हें बहुत कुछ करना है
बस सोचो आज आराम करना है
और कल के कल देखेंगे
बस सोचो कि आज थक चुकी हो
और अब सोना है
और दूसरी सुबह जागाने के बाद
सुबह क्या करना है
ये सुबह देखेंगे
अभी आंखें बंद करनी है
बस आंखें बंद करनी है
और लंबी नींद के साथ लंबी सपनों में जानी है
कोई मीठी सपनों में
जाकर खो जानी है
और उन सपनों के ही
आज रात भर बनके रह जानी है
फिर सुबह के सुबह देखेंगे
खुद के थोड़े हो लेंगे
और फिर जि में जो आऐ वही करेंगे
आराम चाहिए
थकी पलकों को सपनों के नाम चाहिए
और थकी जिस्म को ठंडक
बस अब रहने दो
और नहीं आज कुछ कर पाओगी तो चलेगा ना
बस कहाँ चलेगा
मैं सच में पलके को बंद करना चाहती हूं
मैं सचमुच में आराम करना चाहती हूं
थक चुकी हूं सोना चाहती हूं
अगर यह कविता आप सबको अच्छे लगे तो
आगे पढ़ते रहिए
मैं आपके प्रिय लेखक अभिनिशा❤️🦋💯