मैं तेरे ख़्वाबों की गिरफ़्त में हूँ,
तेरी यादों की हर इक सिफ़्त में हूँ।
तू जो आए तो उजाला छा जाये
वरना मैं शब की हिफ़ाज़त में हूँ।
दिल को तस्कीं कहीं मयस्सर नहीं,
तेरी चाहत की बस हिकमत में हूँ।
हिज्र की आग में जलता रहा,
अब भी मैं इश्क़ की लज़्ज़त में हूँ।
तू मिले या न मिले, ऐ हमदम,
मैं तेरी याद की वो इबादत में हूँ।
- known stranger