"स्वयंम'भू" एहसास"
मेरी तकदीर का है ए एक फसाना,
तेरा मेरा फ़ासला मुकद्दर नहीं मेरा।।
लिखते हैं वह तकदीरे हजारों फ़ासलों की।
पर मेरी तक़दीर तो किसी और फ़ासलों में लिखी हुई है।।
हाथों की रेखाओं में बंधी है किस्मत की दौर सब कहते है।
पर जिसके हाथ नहीं किस्मत तो उसकी भी होती है।।
खामोश होते हैं जिनके होठ आंखें उसकी बोलती है।
क्यू के हर बार इश्क जुबासे बयां नहीं होता।।
प्यार इश्क और मोहब्बत दो दिलों की जान होते हैं।
पर हर दिलों पर "સ્વયમ્'ભૂ" इसका एहसास नहीं होता।।
અશ્વિન રાઠોડ "સ્વયમ્'ભૂ"