✍️ मेरी आत्मकथा
“मिट्टी से शब्दों तक”आत्मजीवनी
✍️ राजु कुमार चौधरी
मेरा नाम राजु कुमार चौधरी है। मेरा जन्म 17 अप्रैल 2005 को नेपाल के मधेश प्रदेश, पर्सा ज़िले के जगरनाथपुर गाउँपालिका, वार्ड नं. 6, प्रसौनी में हुआ। मेरी माता का नाम प्रतिभा देवी और पिता का नाम बिजेश चौधरी है। मैं अपने माता-पिता के संस्कार, संघर्ष और आशीर्वाद के साये में पला-बढ़ा हूँ।
बचपन और परिवार
मेरा बचपन गाँव की मिट्टी, खेतों की हरियाली और सरल जीवनशैली के बीच बीता। सीमित संसाधनों के बावजूद मेरे माता-पिता ने मुझे बड़े सपने देखने की प्रेरणा दी।
माता ने मुझे धैर्य, संवेदनशीलता और प्रेम का महत्व सिखाया, जबकि पिता ने अनुशासन, परिश्रम और जिम्मेदारी का पाठ पढ़ाया।
शिक्षा
मैंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा अपने ही क्षेत्र के विद्यालय से प्राप्त की। पढ़ाई के प्रति मेरी रुचि शुरू से ही अच्छी रही।
मैंने कक्षा 12 (इंटरमीडिएट) सफलतापूर्वक उत्तीर्ण की। वर्तमान में मैं B.A.D. (बैचलर ऑफ एजुकेशन) की पढ़ाई कर रहा हूँ।
शिक्षा मेरे लिए केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह आत्म-विकास और समाज सेवा का मार्ग है। मैं मानता हूँ कि एक शिक्षित व्यक्ति ही समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है।
लेखन की शुरुआत
किताबों और कहानियों से मेरा लगाव किशोरावस्था में और गहरा हो गया। मैंने महसूस किया कि शब्दों में शक्ति होती है — वे दिलों को छू सकते हैं, सोच बदल सकते हैं और प्रेरणा दे सकते हैं।
धीरे-धीरे मैंने स्वयं कहानियाँ और कविताएँ लिखना शुरू किया। मेरे लेखन में प्रेम, संघर्ष, सामाजिक सच्चाई और रहस्य का समावेश रहता है।
संघर्ष और संकल्प
जीवन में कई चुनौतियाँ आईं, लेकिन मैंने हर कठिनाई को सीख में बदला। मेरा विश्वास है कि संघर्ष ही सफलता की नींव है।
मैं लगातार सीखने, आगे बढ़ने और अपने सपनों को साकार करने के लिए प्रयासरत हूँ।
मेरा लक्ष्य
मेरा सपना है कि मैं एक सफल लेखक और शिक्षित समाज निर्माता बनूँ।
मैं चाहता हूँ कि मेरे शब्द लोगों के जीवन में आशा, प्रेरणा और सकारात्मक सोच का संचार करें।
समापन
मैं राजु कुमार चौधरी, एक छोटे से गाँव से निकलकर बड़े सपनों की ओर बढ़ता हुआ एक साधारण युवक हूँ।
मेरी यात्रा अभी जारी है — और हर दिन मैं अपने सपनों के एक कदम और करीब पहुँच रहा हूँ।
"हर शब्द में जादू, हर कहानी में रहस्य — यही मेरी पहचान है।"