ख़त लिखा था आज फिर तेरे नाम,
पर भेज न पाया… डर था अंजाम।
हर लफ़्ज़ में छुपा था मेरा दर्द,
हर स्याही में बहा था दिल का अरमान।
काग़ज़ ने भी पूछ लिया हाल-ए-दिल,
क्यों हर लाइन में आँसू का निशान?
मैंने कहा—जिसे पढ़ना था वो दूर है,
और ख़त लिखकर भी रह गया अनकहा हर बयान। 💔
- kajal jha