first latting go
( ना मिलना ही ठीक है )
बुरा है ये पल,
जब भूल जाना है तुमको,
कुछ ख़्वाब अधूरे ही ठीक हैं,
जानती हूँ,
दिल नहीं लगेगा बिना तेरे,
बिना देखे ही रहना,
अब ठीक है।
याद करूँगी हमेशा तुम्हें,
जब-जब ज़िंदगी मुरझाया करेगी,
पर कोशिश रहेगी न देखने की,
कुछ पल बिन तुम्हारे ही ठीक हैं।
दिल और दिमाग थक चुके हैं मेरे,
ना जाने ये कैसी माया है,
तुम हो तो सब कुछ ठीक लगे,
पर अब समझ लिया है —
तुम पास न हो,तो ही शायद ठीक है।
नए मोड़ पर मिलेंगे एक दिन,
मैं भूल जाऊँ और पूछूँ — कौन हो तुम?
तुम्हारा ज़िक्र तक न हो,
वही अब ठीक है।
— Payal Pardhi