एक ख़ूबसूरत शाम
शाम…
दिन की थकान को चुपचाप समेट लेने वाला वक़्त।
जब सूरज ढलने लगता है और आसमान पर हल्की-सी सुरमई चादर बिछ जाती है,
तब दिल भी जाने क्यों सुकून की एक गहरी सांस ले लेता है।
इस ख़ूबसूरत शाम में हवाओं का लहजा बदल जाता है,
चाय की ख़ुशबू में यादों की मिठास घुल जाती है।
पेड़ों की सरसराहट जैसे कोई पुराना किस्सा सुना रही हो,
और दिल उन लम्हों में खो जाता है जो कभी हमारे थे।
शाम हमें सिखाती है कि हर ढलते दिन के बाद भी
उम्मीद का एक दिया जलता रहता है।
थक कर बैठ जाना हार नहीं होता,
कभी-कभी रुक जाना भी ज़िंदगी का हुस्न होता है।
ये शामें गवाह हैं हमारी ख़ामोश दुआओं की,
अनकही मोहब्बतों की और टूटे-बिखरे ख़्वाबों की।
इसीलिए तो हर शाम ख़ास होती है,
क्योंकि ये हमें अपने आप से मिलने का मौका देती है।