---
🌙 एक ख़ूबसूरत शाम का एहसास 🌙
शाम…
दिन की थकान को अपनी नर्म आग़ोश में समेट लेने वाला वक़्त।
जब सूरज ढलते-ढलते आसमान को सुनहरी और गुलाबी चादर ओढ़ा देता है,
तब दिल भी जाने क्यों सुकून से भर जाता है।
हवा में ठहराव होता है,
पर उस ठहराव में भी एक मीठी सी सरगोशी होती है।
परिंदे अपने घरों की जानिब लौटते हैं
और इंसान अपने दिल के क़रीब।
इस वक़्त चाय की एक प्याली,
बालकनी में बैठा सुकून,
और यादों की धीमी दस्तक —
शाम को और भी ख़ूबसूरत बना देती है।
शाम हमें सिखाती है
कि हर ढलता सूरज अंधेरा नहीं लाता,
बल्कि अगले सवेरे की उम्मीद छोड़ जाता है।
इसीलिए शायद शामें उदास नहीं,
बल्कि सब्र और इत्मीनान से भरी होती हैं।
आज की शाम भी कुछ ऐसी ही है —
न ज़्यादा कहने की चाह,
न कुछ छुपाने की मजबूरी।
बस ख़ुद से मिलने का एक ख़ामोश सा बहाना।
---